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कैसे हुआ भगवद गीता का जन्म

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भगवद्गीता एक हिंदू शास्र है जो वैदिक संस्कृत में हैं, जो की हिंदू महाकाव्य महाभारत का हिस्सा है
भगवद्गीता में 18 अध्याय शामिल हैं जो 700 छंदों के होते हैं और यह बयान, भगवन कृष्ण और पांडव राजकुमार अर्जुन के बिच एक वार्ता का एक वर्णन हैं
इस पाठ का बयान तब किया गया जब कौरवों और पांडवों की सेनाएं एक दुसरे के विरुद्ध खड़ी थी और भगवान कृष्ण ने अर्जुन के रथ के प्रभारी के रन में कुरुक्षेत्र के युध्यक्षेत्र में शामिल हुए थे
इस दौरान, अर्जुन जैसे महँ योद्धा युध्य के मैदान पर दुविधा में पद गए थे की वह अपने ही लोगो के खिलाफ शास्र किसे उठाए
और इसी दुविधा में से बहार निकालने के लिए, भगवान कृष्ण ने अर्जुन को अपने कर्तव्य को पूरा करने और धर्मं की स्थापना करने की सलाह दी
हिंदू विद्वान् किता को धर्मं, भक्ति और कर्म की अवधारणा के मिश्रण के रूप में वर्णित करते हैं
वो कहते हैं की जिस अवधि में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता की शिक्षा दी थी, वह अवधि अर्जुन के किवं कल का सबसे उपयुक्त समय था
गीता के बारें में समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं कि इसका सर और प्रसंगिकता इस तथ्य में निहीं हैं की, आज भी यह हमारे जीवन से जुडी हुई हैं

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