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लक्ष्य जितना बड़ा, मूल्य भी उतना अधिक होता है

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जो व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाता, उसे अंत में असफलता ही मिलती है।
सफलता उसे मिलती है, जो अपने काम और कर्तव्य के लिए ईमानदार है। जो व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाता, उसे अंत में असफलता ही मिलती है। ‘लक्ष्य जितना बड़ा होगा, उसका मूल्य भी उतना अधिक होता है। अगर हम मूल्य नहीं चुका पाते हैं तो वो सफलता भी नहीं मिल पाती है।’ फिर भले ही फिर हम शिखर पर ही क्यों ना हों, उस सफलता का श्रेय नहीं ले सकते। हां उसका अपयश जरूर भुगतना पड़ता है।
युद्ध के मूल कारण बन गए धृतराष्ट्र
धृतराष्ट्र जन्म से अंधे थे। हस्तिनापुर का राजा बनने का पहला अधिकार उनका था, लेकिन अंधा होने के कारण उनके छोटे भाई पांडु को राजा बनाया गया। पांडु की असमय मृत्यु के कारण धृतराष्ट्र को राजा बनाया गया। कुछ समय तक धृतराष्ट्र ने अच्छे से शासन चलाया भी, लेकिन फिर वो पुत्र मोह में फंस गए। दुर्योधन के लिए उनका प्रेम इतना बढ़ गया कि वो राजा होते हुए भी खुद कोई निर्णय नहीं ले पाते थे।
इसका परिणाम हुआ महाभारत युद्ध। अगर धृतराष्ट्र अपने पुत्र के मोह में नहीं फंसते तो शायद इतिहास में उनका नाम कुछ अलग अर्थों में लिया जाता। सिर्फ उनके मोह और पुत्र प्रेम के कारण आज वे एक नायक नहीं, बल्कि महाभारत युद्ध के मूल कारण के रूप में जाने जाते हैं। कहने का अर्थ यही है कि हर सफलता कुछ त्याग और निष्ठा मांगती है।

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